वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

इंसानियत की अनूठी मिसाल, राख हुए आशियानों को मिला ’एक सेवा मानवता के लिए’ का सहारा

नमस्ते इंडिया न्यूज
अजय तावरे
पांढुर्णा

         कहते हैं कि आपदा बताकर नहीं आती, लेकिन जब आती है तो सब कुछ छीन ले जाती है। पांढुर्णा में पिछले दिनों हुए भीषण सिलेंडर ब्लास्ट ने तीन परिवारों की खुशियां और उनका आशियाना पल भर में राख कर दिया। जब मलबे के बीच खड़े ये परिवार अपने भविष्य को लेकर चिंतित थे, तब शहर की सामाजिक संस्था “एक सेवा मानवता के लिए” ने देवदूत बनकर उनके जीवन में आशा की नई किरण जगाई है।

  व्हाट्सएप ग्रुप बना ’मदद का सेतु

यह संस्था किसी भव्य कार्यालय से नहीं, बल्कि एक सक्रिय व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए चलती है। इसमें शहर के प्रतिष्ठित डॉक्टर, व्यापारी और आम नागरिक जुड़े हैं। जैसे ही हादसे की खबर ग्रुप में फैली, मदद का सिलसिला शुरू हो गया। बिना किसी शोर-शराबे के सदस्यों ने सहयोग राशि जुटाई और पीड़ितों तक पहुंचे।

  जरूरतों का रखा ख्याल

        संस्था की ओर से तीनों प्रभावित परिवारों को लगभग 20 हजार रुपए की आवश्यक सामग्री भेंट की गई। इसमें 15 दिनों का संपूर्ण राशन (ताकि चूल्हा फिर जल सके), बच्चों के लिए नए कपड़े, कंबल और अन्य घरेलू जरूरतें और 20 हजार रू. शामिल है।

  गुमनाम रहकर दी मदद

             इस नेक कार्य की सबसे दिल को छू लेने वाली बात यह रही कि मदद करने वाले सदस्यों ने अखबारों में अपना नाम प्रकाशित करने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि “मदद दिखावे के लिए नहीं, संतोष के लिए की गई है।“ यह निस्वार्थ भावना आज के दौर में दुर्लभ है।

   प्रेरणा का केंद्र बनी संस्था

           “एक सेवा मानवता के लिए” ग्रुप पहले भी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और असहाय लोगों की मदद कर चुका है। जाति-धर्म की दीवारों को तोड़कर यह ग्रुप समाज में भाईचारे की मिसाल पेश कर रहा है।

Leave a Comment

और पढ़ें
और पढ़ें